Thursday, March 15, 2018

अपनों से ही हार गए योगी...!

अपनों से ही हार गए योगी ...!

गणेश चन्द पाण्डेय
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कहते हैं जब दुश्मन चोट करे तो सहा जा सकता है लेकिन जब अपने ही चोट करें तो उसे बयां भी करना मुश्किल हो जाता है । कुछ ऐसा ही नजारा गोरखपुर के उपचुनाव में देखने को मिला । जिस मिट्टी को 29 सालों तक अपने खून पसीने से सींचा... । जिस गोरखपुर का नाम देश विदेश में ऊंचा किया ....। जिस शहर को पूर्वांचल व प्रदेश का शान बनाया.... । हिन्दुवादिता की लड़ाई लड़ते हुए हिन्दुओं को उनका मान सम्मान दिलाया.... । आज उसी को उसी के अपनों ने सीधे दिल पर चोट दे दिया और ऐसा चोट दिया जिसे ना तो बयां किया जा सकता है और ना ही तो कंही जिक्र । आखिर योगी के आन बान शान में जनता ने ऐसा दाग क्यों लगा दिया ...? जिस जनता से उन्होंने बेहद प्यार किया उसी जनता ने उन्हें धोखा क्यों दिया ....!

योगी को चुनाव हारने की समीक्षा की जरूरत नही । गोरखपुर की जनता को स्वयं समीक्षा करने की जरूरत है । आखिर योगी के द्वारा दिलाये गए मान सम्मान के बदले उन्होंने योगी को क्या दिया ..? जिसके बदौलत आज गर्व से अपने को हिन्दू कहने वालों ने उन्हें आखिर क्या दिया । गोरखपुर वासियों एक बार जरूर सोचो योगी को आपसब ने दिया क्या..? ...और अगर सोचने समझने की शक्ति ना हो तो गोरखपुर शहर का एक बार भ्रमण पर निकल जाना.. सड़कों का बेरंग मिजाज...., सिसक रहा गोरक्षनाथ मंदिर..., रामगढ़ ताल के ठहरे हुए पानी...., बालबिहार पर चल रही हार की कचहरी....आदि आदि..! ये सब एहसास करा देंगी ...।

गोरखपुर वासियों याद रखो इस उपचुनाव में उपेंद्र दत्त शुक्ल सिर्फ एक नाम था । असल में ये चुनाव तो योगी लड़ रहे थे । जिस योगी के सामने कोई नही टिकता उसे के ऊपर आज उंगली उठाने वालों की तादाद बढ़ गयी है और उसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ गोरखपुर वासी हैं । जिसने योगी के कुर्बानियों का ये सिला दिया । गोरखपुर को गोरक्षनाथ मंदिर की वजह से ही जाना जाता है और इस मंदिर पर अपनी फरियाद ले कर जाने वाले कभी निराश नही हुए । जरा ये भी तो सोचो ....जिस मुख्यमंत्री से कोई मिल नही पाता वो मुख्यमंत्री गोरखपुर जब भी आये..जनता दरबार लगा लेते ...और सबकी समस्याओं को स्वयं सुन कर तत्काल निस्तारण का आदेश देते ...! योगी ने कभी भी जनता दरबार की परंपरा को टूटने नही दिया मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ।  कौन सा मुँह लेकर के अब आप सब उनके दरबार में अपनी समस्या ले कर के जाओगे ..? क्या योगी से नजरें मिला सकते हो ...अरे योगी तो दूर ...क्या खुद से नजरें मिला सकते हो ...? शायद नही और अगर मिला भी लिए तो खुद से सवाल जरूर करना...?

खैर ....गोरखपुर वासियों आप सब का ध्यान एक तरफ और भी ले जाना चाह रहे हैं ...इसलिए ध्यान देना आप सब ...! 

गोरखपुर ! एक सुंदर शहरों में शुमार है । प्रदेश का सम्पन्न शहर गोरखपुर और इस शहर को गोरक्षनाथ मंदिर के पीठाधीश्वरों व योगी आदित्यनाथ के निरंतर संघर्षों से ही बनाया जा सका है । 29 वर्षों के अपने संघर्षों में योगी ने जो लड़ाई गोरखपुर वासियों व गोरखपुर के विकास के लिए निःस्वार्थ भाव से लड़ा है उसे भुलाया नही जा सकता । गोरखपुर का नाम आज गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बुक में भी दर्ज है ... विश्व का सबसे लम्बा रेलवे प्लेटफार्म गोरखपुर में ही है । बाबा राघवदास मेडिकल कालेज गोरखपुर में ही है । मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कालेज भी गोरखपुर में ही है । पण्डित दिन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर में ही है । खाद्य कारखाना, चीनी मिल, डिस्टलरी फैक्ट्री, पवार प्लांट, अधौगिक नगर गीडा भी गोरखपुर में ही है । गोरखपुर वासियों ये आप सब के लिए सौगात से कम नही कि विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित एम्स भी आज गोरखपुर में ही है । गैस पाइप लाइनों को बिछाया जा रहा है । रिंग रोड का निर्माण, रामगढ़ताल को पर्यटन स्थल बनाना, चिड़ियाघर का विस्तार, तारामंडल आदि आदि । 24 घंटे बिजली, पानी की सुविधा या फिर शिक्षा को सुदृण करना, सड़कों को गड्ढा मुक्त करना, गोरखपुर को अन्य शहरों से जोड़ने वाले सड़कों को टू लैन व फोर लैन में बदलना । ये सब तो योगी के अथक प्रयासों का ही देन है । आज जो गोरखपुर विकास की गति को पकड़ा है, गोरखपुर वासियों ! जरा सोचो ! क्या आप सब ने मिलकर इस विकास के रथ को ब्रेक लगाने का काम नही किया ? यही नहीं योगी के ही प्रयासों से मैट्रो भी आप के शहर में आने वाले वर्षों में दिखेगा । आज जिस गोरक्षनाथ चिकित्सालय की सुविधा प्राइवेट अस्पतालों की तरह मात्र चन्द रुपयों में मिल जाती है वो भी योगी का ही देन है ...! साथ ही योगी जी एक मिनी एम्स की स्थापना करने वाले हैं । चिलुआताल का भी सुंदरीकरण किया जाना प्राविधान में है । मेरे प्यारे गोरखपुर वासियों ! ये सारी की सारी सुविधाओं का लुफ्त सिर्फ आप सब के साथ आपके आने वाली पीढियां उठाएंगी । 

योगी और फ़क़ीर में क्या अंतर है ...कुछ भी नही । जो आज भी मुख्यमंत्री हो कर भी योगियों की तरह जीवन यापन करे उसे इस समाज से क्या चाहिए । उसे तो बस जनता का प्यार और सम्मान चाहिए । जिस शहर से सांसद से लेकर के मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया । योगी ने ये सफर अपने लिए नही बल्कि अपने प्यारे गोरखपुर वासियों व गोरखपुर के विकास के लिए तय किया ...जिस गोरखपुर में सभी धर्म सम्प्रदाय के लोग रहते हैं । मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने जो सौगात गोरखपुर की जनता को दिया है वो भूल पाना मुमकिन नही है । सबका साथ, सबका विकास के फार्मूले पर चलने वाले महंत योगी आदित्यनाथ ने ना सिर्फ गोरखपुर को उजाला दिया है जबकि पूरे प्रदेश को प्रकाशमान बनाया है । अभी तो मात्र एक साल ही तो उनका कार्यकाल पूर्ण हुआ फिर भी उन्होंने जो फैसले लिए वो किसी और मुख्यमंत्री के वश की बात नही हैं ।

जनता को खुद अब मंथन करना चाहिए ! क्या वो चाहते हैं ? क्या योगी को फिर वो आन बान शान लौटना चाहेंगे..? क्या फिर गर्व से कहना चाहेंगे कि हम उस शहर के वासी हैं जंहा सबका साथ सबका विकास होता है ? जरा सोचिए .....!

4 comments:

  1. बहुत ही सटीक विश्लेषण किया है आपने, मैं जब सोचत हूँ कि पूर्व के मुख्यमंत्री अपने - अपने जनपद या क्षेत्र का विकास करते रहे हैं वहीं पर योगी जी ने सबका विकास कर रहे हैं, कम से कम अपने घर में ऐसा नहीं होना चाहिए था.....

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  2. बढ़िया राजनीतिक समीक्षा है । वाकई योगी को उनके अपनों ने हीं शिकस्त दी । सभी इस मुगालते में थे कि यह तो पक्की सीट है और किसी ने लीगों से संपर्क करने की जहमत नहीं उठाई ।
    आत्ममंथन की जरूरत हैं।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद भैया जी । आपका कम्मेंट मेरे लिए बहुत जरूरी था । आभार ।

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