Sunday, June 10, 2018

पॉजिटिव खबर : जो आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगी ।


संकल्प ने बदली सूरत

सरकारी विद्यालय या कोई कान्वेंट स्कूल , कन्फ्यूज हो जाएंगे आप

गणेश पाण्डेय 'राज'
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कहते हैं कि अगर मन में जज़्बा हो कुछ कर दिखाने की तो सारी कायनात झुक जाती है उसे बनाने में । बस इच्छा शक्ति प्रबल होनी चाहिए फिर आप जो चाहते हैं वो आपकी मुट्ठी में होगी । एक शायर की ये चन्द पंक्तियां भी इसी ओर इशारा करती हैं - "कौन कहता है कि आसमान में छेद नही होती, एक पत्थर तबियत से तो उछालो यारों" । कहने का तात्पर्य है कि जंहा चाह है वंही राह है । संकल्प से बढ़ कर कुछ भी नही । चलिए ज्यादे भूमिका ना बांधते हुए सीधे मुद्दे पर आते हैं ।


भारत देश के सरकारी विद्यालयों से हम सब बखूबी परिचित हैं । खास करके भवन से लगायत वँहा की शिक्षा व्यवस्था की । कहने में कोई संकोच नही है कि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था का स्तर दिन ब दिन गिरता जा रहा है । एक जमाना था कि प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बैठने के लिए जगह ही कम पड़ती थी और आज प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या नाम मात्र है । वैसे तो सरकार इन विद्यालयों को प्रमोट करने के लिए काफी प्रयासरत है लेकिन उसका सारा प्रयास विफल है । जिन सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखने की बातें आये दिन सरकारें तो करती हैं लेकिन असल मुद्दे पर चर्चा तक नही करती हैं । देश के मुख्यमंत्रियों, सांसदों, विधायकों, अधिकारियों या इनके रिश्तेदारों के एक भी बच्चे आपको इन स्कूलों में पढ़ते हुए नही मिलेंगे अगर मिल गए तो मुझे जरूर बताना !  जबकि यही नेता और अधिकारी आये दिन सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करते रहते हैं ।


उत्तर प्रदेश सरकार इस समय उन विद्यालयों पर नकेल लगाने की कोशिश कर रही है जो मान्यता विहीन है । लेकिन प्राथमिक विद्यालयों व उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षा गुणवत्ता पर ध्यान नही दे पा रही है । इन सरकारी विद्यालयों में आपको बच्चों की संख्याओं की स्थिति देख दंग रह जाएंगे । सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में आये दिन गिरावट होने के कारण सरकारी विद्यालयों में अभिभावक अपने बच्चों को नही भेजना चाह रहे । चाहे वो गरीब का बच्चा ही क्यों ना हो ।

शिक्षा की महत्ता क्या है आप को उन गांवों में भी देखने को मिलेगा जंहा एक ठेला चलाने वाला अभिभावक भी अपने बच्चे को कान्वेंट स्कूलों में भेजने के लिए दिन रात मेहनत करता है । सोचने वाली बात है कि सरकारी विद्यालयों में सारी सुविधाएं मुफ्त होने के बावजूद अभिभावक अपने बच्चों को क्यों नही भेज रहा है ? जबकि इन विद्यालयों में प्रशिक्षित अध्यापक उपलब्ध हैं । फिर भी छात्रों के नामांकन और उपस्थिति में जमीन आसमान का अंतर देखने को मिलता है । वंही ध्यान देने वाली बात है कि सरकार आज जिन मान्यताविहीन विद्यालयों को बन्द करवा रही है उसमें अध्यापन कार्य करने वालों की पगार सरकारी विद्यालय के अध्यापक के एक चौथाई भी नही है और ना ही सरकारी अध्यापक की तरह क्वालिफिकेशन । फिर भी वँहा बच्चों की संख्या काफी अच्छी देखने को मिलती है । ...इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी विद्यालयों के अध्यापक ना ही अपने जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन कर रहे हैं और ना ही तो इन विद्यालयों में कोई सिस्टम ही ठीक ढंग से कार्य कर रहा है । ऐसे में एक खबर आप को जरूर कुछ राहत देगी ।


जिस खबर की मैं चर्चा करने जा रहा हूँ वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के भटहट विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय कैथवलिया से है । यंहा के ग्राम प्रधान ने कैथवलिया प्राथमिक विद्यालय को कान्वेंट स्कूल बना दिया है । योगी सरकार के मंशा के अनुरूप भटहट क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय कैथवलिया विद्यालय परिवार व ग्राम प्रधान के सकारात्मक सोच के बदौलत कान्वेंट स्कूल को भी मात दे दिया है । पूरा विद्यालय परिसर टाइल्स व अत्याधुनिक संसाधन से युक्त हो चुका है । विद्यालय परिवार ग्राम प्रधान को धन्यवाद देते हुए संकल्प लिया है कि प्रधान ने बदली विद्यालय की सूरत से अब हम सब मिलकर बच्चों का सूरत बदल देंगे । वंही अब ये विद्यालय पूरे ब्लाक क्षेत्र के साथ जनपद में चर्चा का विषय भी बन गया है ।


भटहट ब्लाक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कैथवलिया में सत्र 2017 - 18 के समापन के दौरान आयोजित शिक्षक - अभिभावक बैठक में विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओंकारनाथ सिंह व शिक्षकों ने विद्यालय भवन व अन्य संसाधनों के भारी कमी से ग्राम प्रधान विन्देश्वरी गुप्ता को अवगत कराते हुए बेहतर शैक्षणिक माहौल स्थापित करने का अनुरोध किया था । जिस पर ग्राम प्रधान ने शिक्षकों से संकल्प कराया कि मैं विद्यालय परिसर का कायाकल्प कर दूंगा बशर्ते आप लोग बच्चों के सूरत बदलने हेतु संकल्पित होवें । शिक्षकगण ओंकारनाथ सिंह, रमेश मणि त्रिपाठ , रचना श्रीवास्तवा, ऋतु कोरी शिक्षामित्रगण फखरुद्दीन खान व कविता साहनी ने बैठक में पूरे ग्रामसभा के सामने बच्चों का सूरत बदलने का संकल्प लिया ।


फिर क्या था ग्रामप्रधान विन्देश्वरी गुप्ता ने विद्यालय का छत व फर्श की मरम्मत कराने के साथ ही कक्षा कक्ष व पूरे परिसर में टाईल्स लगवाया। बच्चों के खेल स्थान पर इंटरलॉकिंग, शौचालय को दुरुस्त कराने के बाद पूरे विद्यालय का डिजाइन पेंटिंग करा डाली । जिस पर शिक्षकों ने ग्रामप्रधान की उपस्थिति में वचन दिया कि आपने विद्यालय की सूरत बदली है अब हम बच्चों का सूरत बदल कर रहेंगे । वंही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भुपेंद्रनारायण सिंह ने ग्रामप्रधान व विद्यालय परिवार को इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा की है और बेहतर शैक्षणिक माहौल स्थापित करने का आग्रह किया है तथा अन्य प्राथमिक विद्यालयों को भी इससे सीख लेने की अपील की है ।


अगर इसी प्रकार धीरे धीरे ही सही सरकारी विद्यालयों की सूरत बदली जाय तो वो दिन दूर नही जब सरकारी विद्यालयों में बच्चों की संख्या देखने लायक होगी । लेकिन सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा । तभी जा कर के हमारे बच्चों का भविष्य स्वर्णिम हो सकेगा ।



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